Pashupatinath Vrat पशुपतिनाथ व्रत कैसे किया जाता है और व्रत से क्या लाभ होते है ?

By | July 14, 2022
Pashupatinath Vrat vidhi

दोस्तों, आज हम आपको हमारे आर्टिकल में बताएँगे की पशुपतिनाथ व्रत कैसे किया जाता है? क्या है पशुपतिनाथ व्रत की विधि ? पशुपतिनाथ व्रत की महिमा क्या हैं ? पशुपतिनाथ व्रत कैसे करे? पशुपतिनाथ व्रत से क्या लाभ होते है ? कई लोग पशुपतिनाथ व्रत की विधि अपने तरीके से बना कर लिख रहे है इसलिए आपको सावधान रहना चाहिए। क्योंकी व्रत गलत करने से अच्छा है व्रत ना करे या पूरी तरीके से व्रत की जानकारी लेकर करे।

14 July 2022 Update :-

सावन के महीने में पशुपति व्रत ले सकते हैं ?

सावन 14 जुलाई 2022 से शुरू हो रहा हैं। ये सवाल हर किसी के मन में आ रहा हैं की सावन के महीने में पशुपतिनाथ व्रत शुरू कर सकते हैं या पहले से लिए हुए पशुपति नाथ व्रत को जारी रख सकते हैं ? आज हम उसी का जवाब ले कर आये हैं यदि आप पशुपति नाथ व्रत लेना चाहते हैं तो आप ले सकते हैं लेकिन वही ले सकते हैं जो सावन सोमवार का व्रत नहीं करते हैं। यदि आप सावन के सोमवार का व्रत करते हैं तो पशुपति नाथ व्रत ना ले। सावन मास समाप्त होने के बाद ही ले।
जो महिलाये या पुरुष पशुपति व्रत कर रहे हैं और आप हर वर्ष सावन सोमवार का व्रत करते हैं तो आपको व्रत तो करना हैं लेकिन पशुपति व्रत की गिनती में नहीं आएगा। सावन माह समाप्त होने के बाद आप विधि पूर्वक पशुपति व्रत करें।

नोट :- यदि आप सावन सोमवार के व्रत नहीं करते हैं तो सावन के महीने में पशुपतिनाथ व्रत शुरू कर सकते हैं और पहले से लिए हुए पशुपति नाथ व्रत को जारी भी रख सकते हैं ?

पशुपतिनाथ व्रत की महिमा (Pashupatinath Vrat Mahima)

पशुपतिनाथ व्रत करने से कई तरह के लाभ होते है इसकी महिमा आप तभी जान पाएंगे जब इस व्रत को अपनी पूरी श्रध्द्दा और इच्छा से करेंगे। इस व्रत को करने से आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। इस व्रत को करने से आपके रुके हुए काम आसानी से हो जायेंगे। एक बार आप भगवान पशुपतिनाथ के चरणों में जाएंगे तो देवो के देव महादेव आपकी सच्ची श्रद्धा से किये गए व्रत का फल अवश्य देंगे ऐसा शिव महापुराण की कथा में वर्णित है।

पशुपतिनाथ व्रत कब करना चाहिए? / Pashupatinath Vrat Kab Se Karna Chahiye ?

पशुपतिनाथ व्रत की शुरुआत आप किसी भी सोमवार से कर सकते है, इसके लिए कोई तिथि देखने की जरुरत नहीं है आप इसे शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष, होलाष्टक हो या कोई तारा अस्त हो कभी भी कर सकते है।

पशुपतिनाथ व्रत कब नहीं करना चाहिए ? / Pashupatinath Vrat Kab Nahi Karna Chahiye 

भगवान पशुपतिनाथ खुद ही इस संसार के समस्त पशु – मनुष्य, देवो आदि के नाथ है इसलिए वे नहीं ऐसा कभी नहीं चाहेंगे की उनके किसी भी भक्त को कष्ट हो इसलिए बीमार, बुजुर्ग जो बीमार, गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।

पशुपतिनाथ व्रत किसे करना चाहिए ? / Pashupatinath Vrat Kise Karna Chahiye ?

पशुपतिनाथ व्रत कोई भी पुरुष – महिला द्वारा किया जा सकता है, लेकिन स्त्री अपने मासिक धर्म के दौरान परिवार के कोई स्नेही स्वजन से पूजा करवा सकती है और यही पूजा भी संभव नहीं हो तो सिर्फ व्रत भी किया जा सकता है।

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पशुपतिनाथ व्रत की विधि / पशुपतिनाथ व्रत कैसे करे ?

Pashupatinath Vrat Sampurn Vidhi

सबसे पहले सोमवार सुबह ब्रम्ह महूर्त में उठकर नहाने के बाद पूजा की थाली तैयार करनी चाहिए। पूजा की थाली में कुमकुम, अबीर, गुलाल, अष्टगंधा, लाल चन्दन, पीला चन्दन, अक्षत (बिना खंडित चावल) रखे। दोस्तों याद रखे कई लोग अपनी इच्छा अनुसार धतूरा, भाग, आंकड़ा भी रखते है लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है लेकिन अगर आपके पास सारी चीज़े नहीं है तो इसकी कोई जरुरत नहीं है क्यों की भगवान महादेव को भोले है भोलेनाथ है उन्हें किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं है बस वे तो भक्त प्रेम देखते है, इसलिए आप प्रेम से पूजन की थाली के साथ ताम्बे के लोटे में शुद्ध जल ले और बिल्व पत्र रखले। याद रहे पूजा की थाली में रखी गया सारी वस्तुए आपको शाम को भी इस्तेमाल करनी है इसलिए उसे अधिक मात्रा में रखे। अगर आपके पास बिल्व पत्र नहीं है तो मंदिर में रखे बिल्व पत्र को धोकर इस्तेमाल कर सकते है।

अब मंदिर में जाने से पहले ये याद रखले की आपको पहला व्रत जिस मंदिर में करना है बाकी की सारे व्रत भी उसी मंदिर में करने होंगे इसलिए महादेव के ऐसे मंदिर में ही जाए जिसमे आप आसानी से सारे व्रत के दौरान पूजा कर सकते है।

मंदिर में जाकर सबसे पहले भगवान को प्रणाम करे और मन ही मन व्रत का संकल्प ले। शिवलिंग के पास पहुंच कर उसके आसपास थोड़ी सफाई कर दे। शिवलिंग का अभिषेक जल से करे और याद रखे किसी हड़बड़ी में जल न चढ़ाये आराम धीमे धीमे धार से जल चढ़ाये और मन में “ॐ नमः शिवाय” या “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ” मन्त्र का जाप करे और बाबा भोले नाथ को हलके हाथो से साफ़ करे। फिर बाबा का पूजन कर बिल्व पत्र सही तरीके से चढ़ाये।

घर पहुंचकर पूजा की थाली को पूजा घर में रख दे। अब प्रदोष काल में वही पूजा की थाली के साथ बिल्व पत्र और मिठाई का प्रसाद रखले साथ ही ६ दिये भी आपकी थाली में रखले। अब प्रदोष काल में उसी मंदिर में जाकर भगवान महादेव का पूजा अभिषेक आदि करके बिल्व पत्र सही तरीके से चढ़ाये। अब मिठाई के 3 हिस्से महादेव के सामने ही करे और 6 दियो मे से महादेव के सामने 5 दिये जला दे और मन ही मन अपनी कामना करके प्रभु से प्रार्थना करे। प्रसाद का तीसरा भाग और एक दिया अपने साथ ले आये। घर आकर अन्दर आने से पहले दाये हाथ पर उस दिए को जला दे और वही छोड़ दे। अब आप शाम के फलाहार से पहले उस प्रसाद को खाली तथा याद रखे आपको प्रसाद किसी के साथ नहीं बांटना है वो आपको अकेले ही खाना है।
इस तरह आपका पहला व्रत पूरा हुआ और इसी तरह हर सोमवार आपको व्रत करना है।

 

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