IIT-Madras: अब भारतीय मसालों से होगा कैंसर का इलाज; जल्द शुरू होंगे क्लिनिकल ट्रायल

By | 27 February 2024
IIT Madras Research on indian spices to treat cancer

IIT-Madras Chemical Department: आईआईटी मद्रास के रिसर्च में भारतीय मसालों के इस्तेमाल का पेटेंट कराया है, जो कैंसर, थाइरॉइड जैसी भयंकर बीमारियों के उपचार में कारगार साबित हो सकते हैं। IIT-Madras Researchers Patent use of Indian spices to treat cancer; clinical trials to begin soon

भारतीय मसाले केवल खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ कई बिमारियों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं , हाल ही में IIT-Madras की रिसर्च में कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में रामबाण साबित होने का भी दावा किया हैं। इस बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के शोधकर्ताओं ने उन भारतीय मसालों के इस्तेमाल का पेटेंट कराया है, अधिकारियों ने रविवार को बताया कि औषधीय गुणों वाले इन मसालों के इस्तेमाल से बनने वाली दवाइयां 2028 तक बाजार में उपलब्ध होने की संभावना है।

IIT Madras के अधिकारीयों का कहना हैं भारतीय मसालों से बनी नैनो दवाइयों ने सभी प्रकार के कैंसर जैसे लंग, ब्रेस्ट, कोलन, सर्वाइकल, ओरल और थायरॉयड में कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) पर असर दिखाया है। हालांकि, यह दवाइयां सामान्य कोशिकाओं में सुरक्षित पाईं गईं। शोधकर्ता अभी कैंसर दवाओं की सुरक्षा और लागत के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। सुरक्षा और लागत मौजूदा कैंसर दवाओं के मामले में प्रमुख चुनौतियां हैं।

जहा केंसर आज कल आम होता जा रहा हैं। कैंसर का मुख्य कारण आज कल की लाइफस्टाइल हैं बाहरी खानपान और आरामदायक जीवन जिससे शारीरिक परिश्रम तो कम हो गया हैं लेकिन मानसिक तनाव बहुत बढ़ गया हैं। जिससे कैंसर के के मरीज ज्यादा बाद गए हैं। हाल ही में IIT Madras भारतीय मसालों से कैंसर नैनों दवाइयां बनाई जिसका जानवरों पर सफलतापूर्वक अध्ययन किया जा चूका है। अब 2027-28 तक इन दवाओं को बाजार में उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ नैदानिक परीक्षणों (क्लिनिकल ट्रायल) की योजना बनाई है।

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आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर श्री आर. नागराजन का कहना हैं की , “भारतीय मसालों को युगों से स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है। उनकी जैव उपलब्धता ने उनके अनुप्रयोग और उपयोग को सीमित कर दिया है। नैनो-इमल्शन का सूत्र इस सीमा को पार कर जाता है। नैनो-इमल्शन की स्थिरता पर विचार किया जाना महत्वपूर्ण था और हमारी प्रयोगशाला में इस सूत्र को अपनाया गया। उन्होंने कहा, सक्रिय अवयवों और कैंसर कोशिकाओं के साथ संपर्क के तरीकों की पहचान करने के लिए अध्ययन जरूरी हैं और हमारी प्रयोगशालाओं में यह अध्ययन जारी रहेंगे”।


नागराजन ने कहा, पारंपरिक कैंसर उपचाचार थेरेपी की तुलना में नैनो-ऑन्कोलॉजी के कई फायदे हैं। उन्होंने बताया कि नैनो-ऑन्कोलॉजी में कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं और उपचार में कम लागत आती है।

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